Compartir
Kainat -E-Gazal (en Hindi)
Samar Kabeer
(Autor)
·
Redgrab Books Pvt Ltd
· Tapa Blanda
Kainat -E-Gazal (en Hindi) - Kabeer, Samar
Libro Nuevo
Origen: España
Envío: 6 a 7 días háb.
21,78 €20,69 €
Reseña del libro "Kainat -E-Gazal (en Hindi)"
समर कबीर' को शाइरी का फ़न विरासत में मिला है,उनके वालिद-ए-मुहतरम 'क़मर उज्जैनी साहिब (मरहूम) अपने दौर के क़ाबिल-ए-ज़िक्र शाइर थे, बड़े ख़ुश फ़िक्र और वज़ादार इंसान थे । वो अपनी तमाम आला इंसानी अक़दार जिनसे तहज़ीब-ओ-तमद्दुन को जिला मिलती है 'क़मर' उज्जैनी को अपने विरसे में मिली थीं, यही वो विरासत है जिसे 'समर कबीर' ने अपनी शनाख़्त का वसीला बनाया है । 'समर कबीर' के शे र से एक ऐसे शख़्स का किरदार उभरता है जो अपने दौर की दोग़ली सियासत और अख़लाक़ी क़दरों की पामाली का मातम गुसार है जिसे वहदत-ए-इंसानी का तसव्वुर सबसे अज़ीज़ है लेकिन क़दम-क़दम पर इंसानों के माबेन मुग़ायरत बेगानगी और फ़ासलों की गहरी ख़लीजें देख कर वो तड़प उठता है, एक तख़लीक़ी फ़नकार होने के नाते वो इस अह्द की इन सियाहियों को अपने अंदर जज़्ब कर सकता है और न ही उनके मुताबिक़ अपने आप को ढाल सकता है, दर अस्ल 'समर कबीर की शाइरी में इसी बुनियाद पर तल्ख़ी और तंज़ के पहलू ने ज़ियादा जगह बना ली है । रिवायती मज़ामीन की तकरार के बजाय इस शाइरी में शाइर की ज़ात और उसके शिकवे और उसके अंदेशे ज़ियादा कार फ़रमा हैं जिनसे शाइर के सच्चे जज़्बों तक हमारी रसाई होती है - 'आइना गर ज़रा बता क्या है एक चहरे में दूसरा क्या है' 'और थोडा सा ज़ह्र घुलने दो आदमी-आदमी &
- 0% (0)
- 0% (0)
- 0% (0)
- 0% (0)
- 0% (0)
Todos los libros de nuestro catálogo son Originales.
El libro está escrito en Hindi.
La encuadernación de esta edición es Tapa Blanda.
✓ Producto agregado correctamente al carro, Ir a Pagar.